मंगलवार, फ़रवरी 07, 2017

वोटों के व्यापारी आये

सपनों की फुलवारी लाये,
वोटों के व्यापारी आये..........


जाति धर्म की बातें करते,
वोटो की खातिर ये साथी,
वादों में हमको बरगलाते,
सत्ता के शातिर ये साथी,
जिस पर हमको चलना है,
वो ये शमशीर दुधारी लाये,
वोटों के व्यापारी आये................



जातियों के नाग हैं फिर से,
आरक्षण के दाग हैं फिर से,
खोखले वादे झूंठा विकास,
साम्प्रदायिक आग है फिर से,
जनता से छल करने खातिर,
व्यव्हार कुशल व्यवहारी आये,
वोटों के व्यापारी आये..............