बुधवार, फ़रवरी 03, 2016

......रावण सी दानवी,और कभी राम सी ....

जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........
तोड़ती है एक झटके में कभी सपने सभी
अपने बेगाने होते, बेगाने अपने कभी,
कभी भरती मुंह में कड़वाहट नीम सी,
कभी खुद बनती साकी, कभी खुद जाम सी 
जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........
कई बार जिंदगी मृगतृष्णा शाम ओ शहर,
जेठ की दोपहरी से तपते चारो पहर,
कभी खुद बनके सावन, पींगे बढ़ाती है,
माँ के आँचल में कभी करती आराम सी,
जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........
कभी इतनी कीमती, छोड़ नही पाते हैं,
खुशियाँ खरीदने, सब कुछ लुटाते हैं,
खुशियां दे हमको दुआ सदा मांगती,
बेशकीमती ये जिंदगी लगती है आम सी
जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........
कभी तन्हाई में गुनगुनाती जिंदगी,
शमशान में भी चहचहाती जिंदगी,
कभी मेले में भी तन्हा रह जाते हैं,
महफ़िल में लगती जिंदगी बेदाम सी
जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........
जिंदगी तो जिंदगी है जिसका अपना फलसफा
कब कहाँ ये लूट ले झोलियाँ भर दे कहाँ ,
जिन्दगी ने क्या दिया इसको ना सोचिये,
खट्टी और मीठी ये रब का पैगाम सी
जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,
रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........