शनिवार, दिसंबर 28, 2013

तलवार धार चलकर, है व्यवस्था तुझे बदलना.

तलवार है दुधारी, जिस पथ है तुझको चलना,
है तेरे अपने हाथ ही, गिरना और सम्भलना......

सियासत में बहुत शातिर, है ये कॉंग्रेस प्यारे,
गिरगिट से सिखा इसने, पल पल में रंग बदलना...........

इसने दिया समर्थन, ये बात ना अजब  है,
रहना जरा सम्भलकर, न पड़ जाए हाथ मलना..........

इनके किये घोटाले, तुम जांच कैसे लोगे?
इन संग कदम मिलाकर, जब साथ तुमको चलना?.......

हवा में उड़ ना जाएँ, आदर्श सब तुम्हारे,
बचना जरा सम्भलना, मिल जाए इन से छलना............

सत्ता के लोभ प्यारे, इक पल भी गर झुके तुम,
इस देश कि ये जनता, तेरे साथ होगी कलना...........

तुझे याद रखना होगा, नही सत्ता कि जंग तेरी,
तलवार धार चलकर, है व्यवस्था तुझे बदलना........
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आदरणीय केजरीवाल जी अपने आप में बेहद समझदार हैं, आम आदमी को उनसे बहुत उम्मीदें हैं, लोभ मानव मात्र कि कमजोरी है, अब आप आम नही खास हो गई है पूरी आप टीम को सत्ता के मद से सावधान रहना होगा, क्योंकि आप सत्ता परिवर्त्तन के लिए नही बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए मैदान में लाखों आकांछाओं का बोझ ले कर उतरी है.