शनिवार, अक्तूबर 13, 2012

...कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में...

जनता को भी याद नही घोटाले कितने हुए,
कितने मुंह काले हुए कोयले की दलाली में...........
पचास लाख क्यूँकर पाँच सौ करोड़ बने,
कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में.............
विकलांगों का पैसा किस किस की जेब गया,
रातों रात महल कैसे बने जगह खाली में.............
टू जी और थ्री जी का दौर कब गुजर गया,
सागर समाया क्यूँकर चाय की प्याली में...............
हर दिन इनका ईद, रात हर दिवाली,
दीवाला जनता का, हरेक दिवाली में..............
एक घोटाला चलो भूल भी जाता ये देश,
बाग़ को लूटने की हौड लगी माली में..............
गैस रसोई से गई दाल भात पेट से,
आटा भी गीला हुआ अब तो कंगाली में..............