शुक्रवार, जुलाई 06, 2012

चिता पे बैठ शान्ति गीत गा रहा है दोस्तों,

चिता पे बैठ शान्ति गीत गा रहा है दोस्तों,
आदमी ही आदमी को खा रहा है दोस्तों ...........
देह की भूख प्यारे, प्यार पथ ले गई,
मजबूरी वश नेह धर्म निभा रहा है दोस्तों ..............
माँ ओ बीबी की जंग जिन्दगी बदरंग सी,
अजीब दुविधा में खुद को पा रहा है दोस्तों .............
बेटियों को मार और बहनों को कत्ल कर,
प्रगति शील खुद को कहा रहा है दोस्तों,...............
जंगलों का छरन कर मंगल की कामना.
जहर जिन्दगी में नित बसा रहा है दोस्तों ...........
सरकारी पाले में है मौज करने को वो,
दिखावे को ही गाल बजा रहा है दोस्तों ..............
सबके अपने गीत हैं सबकी अपनी प्रीत है,
पर महफिले दुश्मनी सजा रहा है दोस्तों .............