रविवार, मई 27, 2012

''लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं'

वन्दे मातरम दोस्तों,

माना तुम्हारी वाह के, हकदार हम नही,
पल में भुलाये जाएँ, वो फनकार हम नही..........  
क्यों सूलियों पे हमको चढाते हो बारहा,
सबको खबर है यारा, गुनाहगार हम नही.............
कशमीर से कन्याकुमारी तक सब हमारा है,
फकत यूपी, उड़ीसा या बिहार हम नही.............
गरजो, उठो, बतादो, सत्तानसिनों को,
अब और जुल्म सहने, तैयार हम नही.............
तख्तो- ताज पल में, बदल दे वो गीत है,
सिर्फ प्यार के ही यारा, अशआर हम नही .............
सोचता है मेरा, ज़िहन भी बगावतें,
तुम ठूंसो जिसमे अपनी, वो भंगार हम नही.............
अपनी पे गर आ जाएँ, कलम के हम सिपाही,
जमाना न बदल दे, वो हथियार हम नही...........
जो तू डगर ना आया, ना कहेंगे हम "दीवाना"
''लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं''.............