बुधवार, अक्तूबर 12, 2011

***जीत से हार से,***

गोली से बारूद से न तीर ओ तलवार से,
आदमी सुखी होगा अमन ओ प्यार से........

सिकंदर ने राज किया आधे जहान पर,
खाली हाथ गया क्या ले गया संसार से ..............

हिटलर की दुनिया भी खून से रंगरेज़ थी,
नाजी ने पाया क्या जीत से हार से............

तानाशाही से कहाँ हासिल कब कुछ हुआ,
वक्त तानाशाह है कौन बचा इसकी मार से .........

छोटी सी जिन्दगी मैं दुश्मनी ओ बैर क्यूँ ,
हंसो और हंसाओ करो सामना बहार से.........