रविवार, अक्तूबर 23, 2011

कह मुकरियाँ

वन्दे मातरम बंधुओं,

मेरी कोख से जन्म लिया जिन,
सीना मेरा छलनी किया तिन,
निज औकत का नही है भान,
क्यों सखी बेटा? नही सखी पकिस्तान !!1!!

मैंने ही जिसको है बनाया,
सुख यश और सम्मान दिलाया,
मेरे ही दम से जो दमदार,
क्यों सखी साजन? नही सखी सरकार !!2!!

वो करता हमपे वार पे वार,
फिर भी हम करते सत्कार,
आसमान पर जिसके भाव,
क्यों सखी दामाद? नही सखी कसाब !!3!!

जीवन भर जो मांगे खाए,
मांगने ही जो दर पे आये,
सदा ही हमसे जो है लेता,
क्यों सखी भिखारी? नही सखी नेता !!4!!

हमको निश दिन नाच नचाये,
कई दिनों तक भूखा सुलाए,
जुदा किये जिन बहन ओ भाई,
क्यों सखी शासक? नही सखी महंगाई !!5!!

निज जीत पे फूले नही समाते,
हारे को नीचा है दिखाते,
गालियों की सौगात देते भेज,
क्यों सखी पगला? नही सखी अंग्रेज !!6!!

मांस बड़े स्वाद से चबाये,
हड्डी को भी चूसे जाए,
चमड़ी की भी है दरकार,
क्यों सखी कुक्कर? नही सखी सरकार !!7!!