गुरुवार, सितंबर 29, 2011

अहिंसा की रट छोड़ हाथ तलवार होना चाहिए

वन्दे मातरम बंधुओं,

ऑनर किलिंग की शमशीर, सर पे लटकी है अगरचे,
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिए ..........

लैला ओ मजनू की तरह, संग ना तू सह "दीवाना'
संगकारो के लिए तुझे, संगकार होना चाहिए.........

बेटियों को कोख में ही, मारने का दौर है ये,
मर्द मर्द की शादी को, तैयार होना चाहिए ...........

सत्ता पे काबिज हुआ, सियारों का झुण्ड ये,
जाग नींद से सिंह की हुंकार होना चाहिए.............

सामने दुश्मन खड़ा गुर्रा रहा जबकि दोस्त,
अहिंसा की रट छोड़ हाथ तलवार होना चाहिए .........

सोयी हुई जवानी नींद से जगा दे जो,
क्रान्ति मशाल जला दे वो फ़नकार होना चाहिए .........

महल जिनके हैं खड़े मेरी मेहनत मार कर,
तिहाड़ ही उनके लिए घर बार होना चाहिए .............

घोटाले ही सह रही है जनता उनके राज में,
अब तो होगा सोचना क्यूँ ऐसा सरदार होना चाहिए?...........