सोमवार, अगस्त 29, 2011

फिजा में है गर्जना, एक नौजवान की...

वन्दे मातरम आदरणीय बंधुओं,
मेरा एक छोटा सा प्रयास आपके सम्मुख है .........

अन्ना हजारे के अनशन पर 

 
राम लीला मैदान से, बहती हुई हवा,
आमद है यकीनन, एक नये तूफ़ान की.........
जागो, उठो, लडो, कि तुम्हे जीतना ही है,
फिजा में है गर्जना, एक नौजवान की........
लोकपाल पर जीत
ये, तेरी नही मेरी नही,
सरकार पर जीत ये, है जीत हिन्दुस्तान की......

बिखरते परिवारों
पर

गैरों से क्या शिकवा करूं, अपनों ने है ठगा,
मेरी जां ने ही लगाई कीमत मेरी जान की......... 
कल तक जहाँ रहती थी, खुशियों की ही सदा,
सन्नाटे में गूंजती है चीख , उस मकान की........

मजहब के ठेकेदारों पर

मजहब, धर्म, जातियों में, बट के कल तलक,
हम लूटते रहे जान, मजदूर की किसान की ........
हैं कोशिशें उनकी की हम, फिर्कों में हों बंटे,
पर चल ना सकी दुकनदारी, उनकी दुकान की.......

 
दिल चीर कर दिखाने से, हासिल कहाँ है कुछ,
जो दिखी ना सच्चाई उन्हें, मेरे ब्यान की........
उनको खबर कहाँ कि, जो खामोश हो
ज़बां,
ये शायरी ज़बां है किसी बेज़बान की........