रविवार, जून 26, 2011

आओ मिल जुल के कोई बात बनाई जाए,.........

मर्ग ही जहां पर, फर्द फर्द है,
उस वहशत में चिरागां तो जलाई जाए....

जहर आलूदा साँसों को जो जीवन दे दे,
फिर चमन में वही बयार चलाई जाए.........

जहर नफरत का दिलो में जो बसा है यारों,
मिलो, की मिल के करी उसकी सफाई जाए........

मीलों गहरी हुई जो नफरत से,
है वक्त वो दरार अब मिटाई जाए .........

जहालत ओ जलालत ने किया सब शमशाँ ,
अमन ओ ज्ञान की गंगा तो भाई जाए .....

काश आये जो हर माह ईद और दीवाली,
जा दोस्तों के घर खीर तो खाई जाये ........

 
जो दे चार सू खुशियाँ, वो सौगात तो लाइ जाए.
आओ मिल जुल के कोई बात बनाई जाए,.........