रविवार, जून 19, 2011

लोकपाल पर क्यूँ जारी है, जंग आख़िरश?

वन्दे मातरम बंधुयों,

लोकपाल पर क्यूँ जारी है, जंग आख़िरश,
इसकी मुखालफत जबकि, करता नही कोई ........
हैं आमरण अनशन की, यहाँ धमकियां बहुत,
क्या सबब है फिर भी, मरता नही कोई ........
सरकार भी करती है इसकी, बात रात दिन,
पर ये कैसा घड़ा है जिसको, भरता नही कोई........
कलमाड़ी, कनिमोझी जबकि जेलों में बंद हैं,
मेरे देश के क़ानून से, क्यों डरता नही कोई........
शब्दों के बाण सैकड़ों, चलते हैं रात दिन,
पर क्यों जीस्त के सफर में, उतरता नही कोई ..........
राजनैतिक रोटियां सेका किये सभी,
दुर्भाग्य जनता का दर्द, हरता नही कोई ..........
है वोटों की खातिर, सब जलजले ओ बलबले,
वरना पराई आग, में जरता नही कोई .........