शनिवार, फ़रवरी 19, 2011

***ये लोकतंत्र हुआ बीमार***

कैसा ये लोकतंत्र यार, किसका ये लोकतंत्र यार,
पांचवा साल आते ही, ये रंडी सा सजता हर बार,
इस लोकतंत्र का करो इलाज, ये लोकतंत्र हुआ बीमार...........
ये लोकतंत्र हुआ बीमार...........

जनता का जनता के लिए, जनता के द्वारा था जो,
भ्रष्टों का भ्रष्टों के लिए, भ्रष्टाचारी बन गया वो,
रिश्वत दो और रिश्वत लो, रिश्वत आज बनी व्यापार..........
ये लोकतंत्र हुआ बीमार...........

जो लोकतंत्र था स्वप्न हमारा, आज वही दु:स्वप्न हुआ है,
भगत, सुभाष, नानक का देश अब, भ्रष्ट और भ्रष्टों में खो गया,
मेहनत, मर्यादा, संस्क्रती भूल ये, पैसे की सुनता झंकार..........
ये लोकतंत्र हुआ बीमार...........

सत्ता के शीर्ष पर बैठ पी एम, मजबूरी का गाते गाना,
मैं हूँ और की कठपुतली, सबको वो चाहते हैं बताना,
मैं नाचता वो हैं नचाते,  मुझको तुम ना दो धिक्कार............
ये लोकतंत्र हुआ बीमार...........