गुरुवार, फ़रवरी 03, 2011

***प्याज***


प्याज ने गिराए, कई शासको की आँख आंसू,
शोषितों की आँख आंसू, प्याज ने भराए हैं ..........

सरकारें गिराईं इसने, सरकारें बनाई भी,
केबिनेट को खून के, आंसू ये रुलाये है ........

किसान की मजबूरी, प्याज खाना जरूरी,
प्याज बिना चटनी, बन नही पाए है ...........

प्याज मेल-बार का, रूप बनी है खास,
मिया बीबी के बीच, सौतन सी आये है............

वोट की खातिर, झूठे-झाठे वादे कर,
सरकार तुझे बारम्बार, प्याज सी घुमाए है......

कहे "दीवाना" सुन, प्याज उगाना सुन,
फसल बचा के तू, घर ला जो पाए है ........