मंगलवार, फ़रवरी 01, 2011

***इसकी खातिर खून बहाया है***

क्यों पढ़ाते लोगों को, आजादी केवल "गांधी" लाया है,
"असफाक-ओ- बिस्मिल" ने भी, इसकी खातिर खून बहाया है |


अहिंसा की राह चलने की, बेशक "बापू" राह दिखाए,
लातो के भूतों को बातों से, कब कौन मना यहाँ पाया है |


काँटों की शैया पर काटा, "शहीद भगत" ने जीवन अपना,
"2 अक्टूवर" सा फिर क्यों ना, उनका "जन्म" मनाया है |


"बाल दिवस" पर कितने सारे, आडम्बर हम रचते हैं,
उसको भी तो जरा याद करो, जो "लौह पुरुष" कहाया है |


सादगी और सत्य का जो, सबसे बड़ा पुजारी था,
ये भी तो बतलाओ किसने उसको, "तास्कंद" में मरवाया है |


"नाथू" की गोली ने बेशक, "बापू" का सीना चीर दिया,
"पंजाब केसरी" ने भी अपना, लाठी से जन्म गंवाया है |


आजाद हूँ, "आजाद" रहूँगा, जिसने मन में ठाना था,
आजादी की बलि बेदी पर उसने, खुद अपना "शीश" चढ़ाया है |


आजादी की खातिर जिसने, "आजाद हिंद फौज" का गठन किया,
वह "बंगाली बाबू" अब तक, लौट के घर नही आया है |


"आजादी" बस "बापू, नेहरु" की, मिल्कियत नही है "दीवाना"
"मंगल, ऊधम, लक्ष्मी" ने भी, इसपे खुद को मिटाया है |