शनिवार, दिसंबर 04, 2010

""प्यार बस परिहास बन कर, रह गया है आज कल""

प्यार बस परिहास बन कर, रह गया है आज कल,
टूटा हुआ विश्वास बन कर, रह गया है आज कल..........

सोहनी ओ महिवाल कहिये, या शीरी ओ फरहाद,
नाम बस इतिहास बन कर, रह गया है आज कल.........

जिन्दगी जीना ख़ुशी से, चाहता हर एक बसर,
जीना कठिन संत्रास बन कर, रह गया है आज कल..........

निकलने को मचल रही, पर निकल पाती नही,
ऐसी कठिन एक सांस बन कर, रह गया है आज कल..........

जितना जी चाहे मसलो, जब तलक चाहे मसलो,
ये बदन बस मांस बन कर, रह गया है आज कल..........

आज मुर्दे की सी हालत, आदमी की हो गई,
आदमी नि श्वास बन कर, रह गया है आज कल..........

प्यार, मोहब्बत, के लिए, पैसा आज भगवान बन गया,
पैसा ही बस खास बन कर, रह गया है आज कल..........

आएगा फिर दौर प्यार का, इस जहाँ में फिर दौबारा,
सुंदर भविष्य की आस बन कर, रह गया है आज कल..........

देश का बेडा गर्क कर दिया, वोट के भूके नेताओं ने,
रामराज्य अधूरी प्यास बन कर, रह गया है आज कल..........

प्रक्रति का दोहन करते, नही समझते हम ये बात,
ये दोहन बड़ा विनास बन कर, रह गया है आज कल..........

जंगल, पेड़ काट कर हमने, बना लिए हैं महल दुमहले,
प्रलय बुलाता विकास बन कर, रह गया है आज कल..........

प्यार ओ वफा की कीमत, बाजार में केवल चंद रुपल्ली,
वफा, प्यार वकबास बन कर, रह गया है आज कल............