शुक्रवार, दिसंबर 03, 2010

***प्रेम को हम तिलांजली देते, राह नफरत की खोज ही लेते***

""प्रेम को हम तिलांजली देते, राह नफरत की खोज ही लेते""

प्रेम मुखर होता है अब जब, आनर किलिंग होती है तब,
प्रेम की बलि बेदी पे चडाने, अपनी बहन बेटियों को मिटाने,
प्रेम को हम तिलांजली देते, राह नफरत की खोज ही लेते.............

प्रेम प्रेम है नही समझते, अपने ही प्यार को सही समझते,
क्या नही किसी की वो बिटिया बहना, क्या नही किसी के वो घर का गहना,
खुद हम करते तो सही जताते, बेटी बहना करे तो उसको मिटाते...........

प्रेम का कौन सा रूप ये यारा, अपना प्यार सदा ही प्यारा,
"अपनी" करे तो खोट समझते, इज्जत पर हम चोट समझते,
क्यों अपनों अपनों को मार काटते, उनको दो हिस्सों में बांटते..........

प्रेम सत्य है, श्रष्टि है रचियता , प्रेम डगर से कोई ना बचता,
प्यार नही तो जीवन धोखा, रब सबको ये देता मौका,
क्यों हम पर हाबी नफरत हमारी, जबकि सारी दुनिया प्रेम पुजारी.......