मंगलवार, दिसंबर 21, 2010

***नारी ही हर हाल में, छलती और जलती क्यूँ है?.........

है नारी तू बीबी बन, कभी तंदूर जलाई जाती है,
स्टोव कभी फट जाते हैं, कभी फ्रिज जमाई जाती है,
नारी हर एक रूप में, तूने पुरूष को प्यार किया,
क्यों बहना, बिटिया, आनर किलिंग की बलि बेदी चड़ाई जाती ह?

तंदूर से फ्रिज तक आते, बेशक साल पन्द्रह लग गये,
नारी की तकदीर मगर, नही बदलती क्यूँ है?.............
पुरूष के दुष्कर्मों पर, चुप सारा समाज क्यों?

नारी ही हर हाल में, छलती और जलती क्यूँ है?.........

जो पुरूष करे तो खेल हुआ, वही नारी करे तो पाप अपार,
जब पुरूष हुआ दुष्कर्मी, तब ही नारी सहती बलात्कार,
नर को मिलती नही कोई सजा, नारी की सजा जीवन सारा,
नारी पर होते जुल्म सदा, चुप क्यों प्रगति शील समाज हमारा,