शुक्रवार, दिसंबर 03, 2010

****लड़ने और नफरत के लिए, तुमने खोजा वक्त कहां से.****.......



प्रेम प्रीत को वक्त नही जब, जीवन की आपा धापी में,
लड़ने और नफरत के लिए, तुमने खोजा वक्त कहां से.........

दौलत दौलत करते मर गये, तेरे मेरे दादे परदादे,
दोनों हाथ ही खाली होंगे, जायेंगे जिस वक्त जहाँ से............

नानक का ये देश है प्यारा, इसी में विवेकानन्द है जन्मे,
प्यारा है ये देश सदा ही, प्यार ही मिलता फक्त यहाँ से.........

लालच की ये प्यास तेरी, खत्म ना होती रक्त बीज सी,
तेरी प्यास बुझा पाए जो, लाऊँ इतना रक्त कहां से...........

कब्र में कब के दफन हो गये, हिटलर, नेपोलियन ओ गाजी,
नफरत के सौदागरों अब, दूर हटो मेरे हिन्दोस्ताँ से.........