गुरुवार, दिसंबर 02, 2010

***क्या भारत माँ पे मर सकेंगे.***

प्यार क्या तुमने किया है, और क्या हम कर सकेंगे,     
भगत और सुभाष की तरह क्या, भारत माँ पे मर सकेंगे..............

अंग्रेज जिनके नाम से, कांपा किये थे सुबहो शाम,
अपने घर के गद्दार क्या, हमारे नाम से डर सकेंगे...........

आज अनेकों बंधन जकड़ी, आजादी की दुल्हनियां,
क्या इतनी ताब हमारे भीतर, बन इसका हम वर सकेंगे............
.
देश प्रेम से ओत प्रोत, बलिदानियों की गाथा अमर,
जो उन्होंने दिखलाई, क्या चल हम उस डगर सकेंगे...........

अपने ही से लड़ने बैठे, अपने देश के लाखों दुश्मन,
भय, भूख और भर्ष्टाचार से, आखिर कब लड़ समर सकेंगे........