शुक्रवार, नवंबर 12, 2010

***दूर करूंगा रात मैं काली***

हर भारतीय का, गर्व दिवाली,
दीपों का है, पर्व दिवाली ..........
एक दिया जल कर कहता है,
दूर करूंगा रात मैं काली,.................

माँ लक्ष्मी को हम मनाने चले,
बम पटाखे घर मैं लाने चले,
पूरे घर को सजाया संवारा बहुत,
खुशियों के दीप हम जलाने चले.........

करोड़ों रूपये के हमने फोड़े फटाके,
अरबों की हमने फुल झड़ियाँ चलाईं,
प्रदूषण दिया सारे शहर को हमने,
ऐसे ही नही हमने दिवाली मनाई............

कुछ दुकानों में हुए भयंकर धमाके,
कुछ लोगों को अस्पताल जाना पड़ा,
मिलावट के सांप फन उठाकर खड़े,
महंगा बहुत मिठाई खाना पड़ा...............

दिल मैं मेरे अरमाँ बहुत हैं मगर,
माँ के स्वागत तैयार हर एक बसर,
मनाये तो मनाये कैसे खुश हो दिवाली,
आतंकियों का दिल मैं है डर,