सोमवार, नवंबर 29, 2010

***अहिंसा का दिखावा, करते हम कायर है***

आदरणीय दोस्तों एक सैनिक सीमा पर अपनी जान देकर भी पीछे नही हटता सरहद की रक्षा करता है,अपने देश के दुश्मनों को मार देने या मर जाने के लिए तत्पर रहता है, मगर जब राजनैतिक हलकों से उसे पीछे हटने का आदेश दिया जाता है, तब उस के दिल पर क्या बीतती है यही जज्बात लिखने की छोटी सी कोशिश मेरी इस कविता में है ...........



क्यों हम मान नही लेते हैं,
अहिंसा का दिखावा, करते हम कायर है,
हमको अपनी कुर्सी, गिर जाने का डर है,
क्या फर्क कोई हम पर थूकता अगर है,
क्यों हम मान नही लेते हैं .............
खोखला हमारा क़ानून, खोखले हम है,
दुश्मन से लड़ने का, हम में नही दम है,
कोई मरे मरता रहे, हमे नही गम है
क्यों हम मान नही लेते हैं .............
मुंबई का कसाब नही, हम खुद हत्यारे हैं,
देश की जनता नही, वोट बेंक हमको प्यारे हैं,
26 / 11 में सभी अपने, हमने खुद मारे है,
खुद की ओकात, क्यों हम पहचान नही लेते हैं,
सबसे बड़े गद्दार तुम हो, ये हम क्यों मान नही लेते हैं,
हिजड़ा तुमने हमे भी बनाया,जो हम दुश्मन की जान नही लेते हैं,
वरना भारत देश में, क्या राणा, शिवा, सुभाष नही,
सौ सौ को एक ही मारेगा, इसका उनको एहसास नही,
थोडा भी झटका सह जाए, इतना इनके बदन पर मांस नही,
पर हाथ हमारे तुमने काटे, क्यों काटे ये तुम जानो,
गद्दारों के सरदार हो तुम, मानो तुम या ना मानो,
खुद ही फैसला आज तुम करलो, भारत माँ के दीवानों,