बुधवार, नवंबर 17, 2010

***ईस्वर हर जगह खुद नही आता मगर किसी को भी आपकी मदद को भेज देता है ***

वन्दे मातरम दोस्तों,
एक कहावत है घर को ही आग लग गई घर के चिराग से .............पहली बार ये कहावत मुझ पर ही एकदम सटीक बैठी ..........
हुआ यूँ की मैं नित्य की भांति शनिवार को भी पूजा करके कम्पुटर पर आकर बैठ गया ......... पूजा घर में ही तकरीबन दो फीट दूर वाशिंग मशीन रखी थी जिस पर ढेर सारे कपड़े रखे थे......... ईश्वर की माया ईश्वर ही जाने की किस प्रकार वाशिंग मशीन और उस पर रखे कपड़े होली की तरह जलने लगे ......... मै एकदम घबरा गया मैंने मशीन को लात मारकर कमरे से बाहर निकालने की कोशिश की मगर हुआ उलटा मशीन कमरे में रखे गैस सिलेंडर से जाकर चिपक गई......... मैं गैस सिलेंडर के फटने से होने वाले नुक्सान से भली भांति परिचित हूँ ......  मैंने हड़बड़ाहट में वाशिंग मशीन को दोनों हाथों से पकड़ कर सिलेंडर से दूर धक्का मारा तो वाशिंग मशीन दरवाजे में जाकर फंस गई ........ हालत ये थे की मैं कमरे के अंदर था बाहर निकलने के एकमात्र रास्ते पर वाशिंग मशीन चिपकी हुई थी अंदर भरे धुएं से मेरा दम घुट रहा था ........ बाहर खड़ी मेरी पत्नी निसहाय पानी डालने और चिलाने के अतिरिक्त कुछ कर नही पा रही थी तभी खुदाई खिदमतगार की तरह मेरे पडौसियों ने अपनी अपनी पानी की मोटर्स चलाकर दो तीन पाइप जोड़कर जैसे तैसे उस आग पर काबू पाया .......... और मुझे बेहोशी की हालत में होस्पिटल लेकर गये डाक्टर्स ने मुझे प्राथमिक चिकित्सा दी....... इस दुर्घटना में मेरा सीधा हाथ कलाई तक बुरी तरह जल गया जिसे सही होने में लगभग दो माह लगेंगे........
वो दस मिनट पूरी तरह मेरी मौत से लड़ाई थी बेहोश होने से पूर्व मैं ये आश खो चूका था की मैं जीवित बच सकूंगा, मगर मेरे पडौसियों को ईस्वर ने मुझे बचाने के लिए भेज दिया, ये शायद मेरे किसी पुन्य का फल था या फिर मेरी किसी बड़ी गलती की एक छोटी सजा देकर ईस्वर ने मुझे चेताया की अनजाने में भी कोई बुरा कार्य मत करो........
मैं यहाँ आप सभी से कहना चाहूंगा की हमारे पडौसी हमारे भाइयों के ही समान है इनके साथ कभी भी कोई बुरा व्यवहार नही करना चाहिए