शुक्रवार, नवंबर 12, 2010

***वो दिवाली कब आएगी, जब नफरत द्वेष जलायेगे?***

वो दिवाली कब आएगी, जब नफरत द्वेष जलायेगे?...........

यूँ तो दिवाली पे दिए, हम हर साल जलाते हैं,
वो दिवाली कब आएगी, जब नफरत द्वेष जलायेगे?...........
ढेरों दिए जलाये बेशक, अमावस का तम करने खत्म,
वो दिवाली कब होगी, जब मन का अँधियारा मिटायेंगे?.............
राम की घर वापसी पर, अयोध्या मैं थी मनी दीवाली,
राम के आदर्शों पर चल, हम कब राम को घर लायेंगे?.............
लक्ष्मी को पाने की खातिर, हर उलटी सीधी चाल चलें,
आखिर कब तक अपना जमीर बेच, माँ लक्ष्मी को मनाएंगे?................
कब रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार का, अँधियारा हम हर सकेंगे,
कब राम के पद चिन्हों पर चल, राम राज हम लायेंगे?..............
जब हर सम्त उजियारा हो, वो राम राज्य कब लायेंगे,
कब खुशियों के दीप जलेंगे, कब हम दिवाली मनाएंगे?.........
यूँ तो दिवाली पे दिए, हम हर साल जलाते हैं,
वो दिवाली कब आएगी, जब नफरत द्वेष जलायेगे?...........