गुरुवार, नवंबर 11, 2010

****अँधेरे की जीत ना होगी कभी, सारी दुनिया को ये बताते रहे****

दीप जलते रहे जगमगाते रहे,
काली अमावस को मुंह चिढाते रहे,
अँधेरे की जीत ना होगी कभी,
सारी दुनिया को ये बताते रहे................

बधाईयाँ मिलती रही, बधाईयाँ पाते रहे,
बम, फटाके, फुल झड़ियाँ जलाते रहे,
माँ लक्ष्मी के स्वागत को आतुर सभी,
मिठाइयाँ बांटते रहे, मिठाइयाँ खाते रहे...........

जगमगाता मेरा आज सारा शहर है,
मस्त खुशियों मै डूबा ये सारा नगर है,
मिलजुल मनाया सबने पर्व दिवाली,
दीप लों में दुश्मनी को जलाते रहे .............
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पर एक ख्याल दिल से निकल पाया नही,
पहले सा क्यूँ त्योहारों का साया नही,
दिल मिल न सके एक पल के लिए,
हाथ दिन मैं सौ बार हम मिलाते रहे.......
क्यों इस तरह हम दीवाली मनाते रहे ..........

क्यों सादगी पर दिखावा है भारी बहुत,
रात पूनम की अमावस से कारी बहुत,
करोड़ों रूपये के हमने फोड़े फटाके,
कुछ हाथ एक फुलझड़ी को गिडगिडाते रहे.........
क्यों इस तरह हम दीवाली मनाते रहे ..........