बुधवार, अक्तूबर 20, 2010

***आदमी गुजर करेगा कैसे??


वन्दे मातरम दोस्तों,

बीस रूपये किलो जब बिकेगा आटा,
बीस रूपये किलो जब होगा नमक,
अस्सी रूपये किलो होगा सरसों का तेल,
क्या खायेगा इंसान जीने तलक,
पेट भरेगा कैसे?? आदमी गुजर करेगा कैसे??.............

सत्तर रूपये मीटर, जब बिकेगा लट्ठा,
क्या पहनेगा तब भारत का पट्ठा,
ऐसे ही बड़ेंगे जो सूत के दाम,
नंगे रहेंगे भारतीय तमाम,
ढकेगा बदन कैसे?? मिलेगा कफन कैसे ??.........

तीन सौ रूपये एक सीमेंट की बोरी,
एक ईंट के लिए रूपये जाते हैं पाँच,
दिल्ली जैसे शहर मैं मिट्टी भी कीमती,
बात हम बिलकुल कहते हैं साँच,
घर बनेगा कैसे?? सर छप्पर तनेगा कैसे??.........

रोटी, कपड़ा और मकान,
ये अब हो गये स्वप्न समान,
जीना तो बेहद मुश्किल हैं,
मरना भी कब है आसान ??

पैसा है बेहद जरूरी,शमसान में जलाने को,
हजारों रूपये चाहिए, लकडियाँ लाने को,
दाग क्रिया से ही पहले, मुंह खुलने लगते हैं,
पैसे इनके मुंह मैं ठूंसो, दाग लगवाने को,
तेहरवीं तक नित नये, ब्राह्मण बताते खर्चे,
ब्राह्मणों पे खर्चो हजारों, शांति पाठ करने को,
बिन पैसे तुम शमसान मैं जलोगे कैसे?
बिन पैसे तुम शांति से मरोगे कैसे ?