गुरुवार, अक्तूबर 21, 2010

***इश्क के नगमों से मुझे, नफरत नही है दोस्त***



वन्दे मातरम दोस्तों,

इश्क के नगमों से मुझे,
नफरत नही है दोस्त,
पर प्यार के हंसी धोखे,
मेरी फितरत नही है दोस्त,

प्यार की खातिर मिटना,
जमाने मैं किसे आता है अब,
और प्यार पर मैं मिट जाऊं,
मेरी किस्मत नही है दोस्त,

साथ जीने मरने के वादे,
पर साथ जब रहना हुआ,
दिल ने बस फिर ये कहा,
ये कोई जन्नत नही है दोस्त,

प्यार ने तोडा बहुत,
मैं प्यार पर टूटा बहुत,
प्यार पर और टूट पाऊं,
मेरी हिम्मत नही है दोस्त,

इश्क के नगमों से मुझे,
नफरत नही है दोस्त,
पर प्यार के हंसी धोखे,
मेरी फितरत नही है दोस्त,