शनिवार, अक्तूबर 30, 2010

मेरी ख़ामोशी को सुनो इसमें भी एक पुकार है

तूफ़ान को कैसे हो जाती है खबर ,
कोई कस्ती आ गयी है सागर में.

हर थपेड़ों को सहना चाहती है वो,
पर, भँवर का जाल उसे फांस ही लेता है.

जिन लहरों पर भरोसा किया साहिलों ने,
उन लहरों ने ही तूफ़ान को दावत दी .

हर आते जाते लहरों की सदायें कहती हैं,
मेरी ख़ामोशी को सुनो इसमें भी एक पुकार है.

"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "