बुधवार, अक्तूबर 20, 2010

***आज पत्रकारिता, व्यापार बनकर रह गई***


वन्दे मातरम दोस्तों,

आज पत्रकारिता, व्यापार बनकर रह गई,
अच्छी बुरी हर खबर, बाजार बन कर रह गई,
अपने नफा नुकसान का, करते सदा ये आंकलन,
हर गरीब खबर एक, बेगार बन कर रह गई,

इस हाई प्रोफाइल दौर मैं, खबरें भी यारों बट गई,
इक जमी मैं दब गई, एक मीनार बन कर रह गई,
एक खबर बेकार सी, सारा जमाना जान गया,
एक गरीब लाश भी, बेकार बन कर रह गई,

पूरे दिन दिखा लोगों को, हिरोइन का नया फैशन,
एक बेवा की चीख पुकार, बीमार बन कर रह गई,
इस बाजारे नौ मैं, सच्चाई की बात क्यूं यार,
हर सच्ची खबर बस, भंगार बन कर रह गई,

आज पत्रकारिता एक व्यापार बनकर रह गई है. सब खबरें इन चैनल मालिकों की मर्जी से ही चलती हैं, मैं एक एन जी ओ चलाता हूँ, पुलिस, पब्लिक, पत्रकारों मुजरिमों और राजनेताओं से लगातार ही पाला पढ़ता रहता है, यमुना पार ( देहली ) से सम्बन्धित अधिकतर पत्रकारों से मेरे अच्छे सम्बन्ध है, बहुत सी खबरें हमारे द्वारा ही उन तक पहुंचती हैं, बहुत सी खबरों की सत्यता के लिए ये खुद हमे घटना वाली जगह तक भेजते हैं, बहुत सी खबरें ऐसी होती हैं जो सामाजिक नजरिये से पब्लिक के सामने आनी ही चाहिए मगर न्यूज़ डेस्क पर बैठे लोग इन खबरों का स्तर जानने के बाद ही निर्णय लेते हैं की ये खबर आनी चाहिए या नही,
उदाहरण के लिए मैं बताना चाहूंगा की न्यू उस्मान पुर ( देहली ) थाना अंतर्गत एक माह मैं लग भग 7 लाशें सामने आई उन सभी के बारे मैं मैंने खुद पुलिस उपायुक्त सहित तमाम मीडिया कर्मियों को इनके बारे मैं बताया, बद किस्मती से इन लाशों मैं से अधिकतर नशेड़ियों की या लावारिश थी पुलिस ने इन लाशों का पोस्ट मार्टम कराकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली मीडिया कर्मियों को इन के मरने मैं कोई खबर ही नजर नही आई लिहाजा ये सभी मौतें गुमनामी मैं खोकर रह गई,

और एक उदाहरण बताता हूँ न्यू उस्मान पुर ( देहली ) थाना अंतर्गत ही देह व्यापर व नशे का कारोबार जोर शोर से चल रहा था हमारी एन जी ओ ने इस सबको बंद करने का प्रण किया इसके लिए हमने पुलिस और मीडिया दोनों से ही मदद मांगी मगर मीडिया को इसमें कंही कोई हाई प्रोफाइल मामला नजर नही आया पुलिस ने भी शुरू मैं तो हमारी बात पर कोई कार्यवाही करने की जहमत ही नही उठाई मगर अमित कसाना ( पत्रकार दैनिक जागरण ) द्वारा 18 जुलाई 2009 के अंक मैं इस खबर को प्रकाशित करके पुलिस महकमे मैं खलबली मचा दी और उसके बाद हमारे एरिये मैं चल रहे सभी गैर कानूनी धंधे पुलिस ने चुस्ती दिखाते हुए बंद करवा दिए, ये है वास्तव मैं मीडिया की ताकत, अब मैं पत्रकारों की मजबूरी की बात करता हूँ बहुत से मीडिया कर्मियों से मेरे दोस्ताना सम्बन्ध है मैं जब उनसे इस बात की शिकायत करता हूँ की आप हमारा सहयोग नही करते, बहुत सी खबरें जो बेहद महत्व पूर्ण हैं आप की जानकारी मैं आने के बाद भी जनता के सामने नही आ पाती हैं तो वो बताते हैं की यार हमारे हाथ मैं कुछ नही है हम खबर बना कर दे देते हैं उस खबर को चलाना या प्रकाशित करवाना हमारे हाथ मैं नही होता है, ऊपर बैठे लोगों को खबरों की जरूरत नही होती है उन्हें तो केवल हाई प्रोफाइल और सनसनी खेज खबरों की जरूरत होती है, और बहुत सी खबरों को पुलिस के आला अधिकारी ही नही चाहते हैं की वो खबरें जनता के बीच मैं पहुंचे.

दोस्त कभी पत्रकारिता मैं एक जज्बे की जूनून की जरूरत होती थी मगर अब पत्रकारिता के लिए सनसनी खेज होना जरूरी हो गया है चैनल्स टी आर प़ी के लिए हर खबर को सबसे पहले, सबसे तेज सनसनी खेज बना कर पेश करते हैं खबर का हाई प्रोफाइल होना पहली शर्त है कोई आम आदमी को इन्साफ दिलाने के लिए आगे नही आता गरीब की हत्या भी खबर नही होती और अमीर की कार भी ड़ीवाइडर से टकरा जाये तो मुख्या खबर बन जाती है यमुनापार जैसी गंदी बस्तियों मैं होने वाला बलात्कार भी खबर नही होती और लाजपत नगर या साऊथ एक्स मैं होने वाली छेड खानी भी चैनल्स पर पूरे दिन दिखाई जाती है, यमुनापार की बस्तियों मैं होने वाली लाखों की लूट पर भी चैनल्स की आँख नही खुलती और पाश कालोनी मैं किसी महिला का यदि पर्श भी चोरी हो जाये तो नमक मिर्च लगाकर उसे दिखाया जाता है आम आदमी का अपहरण कोई मायने नही रखता मगर किसी बड़े आदमी का कुत्ता भी खो जाये तो पूरे शहर के मीडिया कर्मी और पुलिस कर्मी पगलाए से उस कुत्ते के पीछे पड़ जाते हैं, सच जानिये मीडिया आज अपनी सही पहचान खोता जा रहा है आज मीडिया की पहचान एक व्यवसाय की हो कर रह गई है, आज मीडिया सच को सामने लाने का साधन ना रह कर अपने नफे नुकसान का आकलन करके कार्य करने वाला व्यापारी बन कर रह गई है. मीडिया आज यह भूल चुका है की वह सम्पूर्ण निजाम बदलने की ताकत रखता है