मंगलवार, अक्तूबर 19, 2010

***भारत बंद***




वन्दे मातरम दोस्तों,

कल भारत बंद था, आपने मैंने हम सभी ने बंद के दौरान क्या क्या हुआ ये मीडिया के माध्यम से लगातार देखा, इस बंद से आम लोगों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ा इसकी चिंता ना विपछी दलों को थी और ना ही सत्ता धारियों को सब राजनीती की विसात पर अपनी अपनी रोटियाँ सकने में व्यस्त थे, छुट भैये नेता बड़े नेताओं की नजर में अपने नम्बर बड़ाने के लिए कवायद कर रहे थे, देश के बारे मैं सोचने की फुर्सत किसे थी.
सोच वह आम गरीब रहा था की आज उसके घर का चूल्हा कैसे जलेगा क्योंकि बंद के चलते आज उसकी मजदूरी मारी गई थी, सोच जिन्दगी और मौत के बीच झूलने वाला वह बीमार और उसके परिजन रहे थे की बंद के चलते वह ठीक समय पर होस्पिटल पहुंच पायेगा या नही, उसका ईलाज करने वाले डाक्टर होस्पिटल पहुंच पाये होंगे या नही, सोच वह फल व सब्जी विक्रेता रहा था जिसका माल बंद के चलते सडक पर खड़े ट्रकों में सड रहा था, सोच वो लोग रहे थे जिन्हें किसी ना किसी जरूरी कार्य से कही पहुचना था और वो बंद के चलते घंटो से जाम मैं फसे हुए थे, सोच वह ऑटो रिक्शा और टैक्सी वाले रहे थे जिन्हें ताजा कमाना और ताजा खाना होता है,
ये नेता गण यह बिलकुल भी सोचने के लिए तैयार नही थे की एक दिन के बंद से देश को अरबों रूपये की छति होती है जिसकी भरपाई के लिए गाज आम आदमी पर ही गिरती है, देश के विकास की गती रूक जाती है बसों और रेल गाड़ियों आदि मैं जो तोड़ फोड़ बंद के दौरान होती है वह सरकारी छति बाद मैं आम आदमी की जेब से ही पूरी की जाती है, बंद के दौरान हिंसा में जो बेकसूर मारे जाते हैं उन और उनके मासूम परिजनों का कोई दोष नही होता है,
भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बंद को असम्बैधानिक करार दिया है मगर किसी को इसकी परवाह नही है सभी को मात्र अपनी ताकत दिखाने भर को शौक है, मैं या कोई भी व्यक्ति ये कभी नही कहेगा की गलत का विरोध नही होना चाहिए विरोध जरूर होना ही चाहिए मगर इस प्रकार से जिसमे (आम आदमी जिसके लिए ही लड़ने की बात ये सभी राजनैतिक दल करते हैं) को कोई परेशानी ना हो, देश की किसी भी सम्पत्ति का कोई नुकसान ना हो क्योंकि देश की सम्पत्ति हमारी अपनी ही सम्पत्ति है, और अन्तत उसका खामियाजा हमे ही भरना होता है.
मैं आप सभी माननीय नेता गणो को बिना मांगे बिलकुल फ्री एक अमूल्य बेशकीमती सलाह देता हूँ अगर आप वास्तव मैं भारतीय जन मानस का भला चाहते हैं तो एक बार मेरी इस सलाह पर अमल करके दिखाइए मेरा दावा है की सरकार को आपके आगे छुकना ही होगा और जो चीजे जन हित मैं नही होगी उन्हें सरकार को ख़त्म करना ही होगा, भारत महात्मा गाँधी को अपना राष्ट्र पिता मानता है उनका एक अचूक हथियार था आमरण अनशन. आप सभी प्रमुख विपछी नेतागण श्री एल के आडवानी जी, श्री मुलायम सिंह यादव जी, श्री मती बिरन्दा करात जी, श्री नीतीश कुमार जी, गडकरी सहाब जी, बाल ठाकरे जी, राज ठाकरे जी, सुषमा स्वराज जी, विजय गोयल जी और ऐसे ही अन्य ढेर सारे अति सम्मानित नेता गण हिम्मत हो तो और यदि वास्तव मैं ही जन मानस के लिए कुछ करने की चाहत हो तो ये बेकार की सनसनी फैलाना बंद करके देहली मैं कही भी आमरण अनशन पर बैठ जाये और ये ऐलान कर दे की जब तक सरकार उनकी मांगे नही मानती तब तक वो चाहे मर भी जाये ये आमरण अनशन खत्म नही होगी, और मेरा दावा है की सरकार कभी भी नही चाहेगी की कोई प्रमुख विपछी नेता गण ऐसा करते हुए मारा जाये और अगले चुनाव मै उस दल को जनता की सहानूभूति हासिल हो सके जिसके सहारे वो दल सत्ता के शीर्ष पर पहुंच सके.
यहाँ मैं एक और दावा करता हूँ की किसी भी राजनेता मैं इतना दम खम नही है की वो आमरण अन शन पर बैठ सके, क्योंकि आप और हम इस बात को भली भांति जानते हैं की ना तो इन नेताओं को देश से ही प्यार है और ना ही देश की गरीब जनता से ही कोई सहानूभूति है इन्हें तो केवल सत्ता के शीर्ष पर पहुचने की जल्दी है और इतना कमाने की चाहत जिससे इनकी आने वाली सात पीड़ियाँ आराम से बैठ कर खा सकें.

***जय हिंद जय भारत ***