शुक्रवार, अक्तूबर 22, 2010

***हम बन ना सके इन्सान कभी,...


वन्दे मातरम दोस्तों,

***भगवान बनने के रखी तमन्ना,
हम बन ना सके इन्सान कभी,...
***दुसरे के सुख से सदा दुखी रहे,
खुद के सुख का न किया सम्मान कभी,...

उस उपर वाले ने संसार बनाते समय किसी के लिए कोई भेदभाव नही किया मगर हमने भेद भाव की सेकड़ों दीवारें खड़ी कर दी इसी पर कुछ लिखने की एक छोटी सी कोशिश है.

उसने तो बनाया था इंसान ही हमे,
हमने ही उसे हिन्दू, मुसलमान बनाया..............
उसने तो बख्सी थी जमी एक ही हमको,
हमने ही उसपे हिंद, चीन, पाकिस्तान बसाया...........
उसने तो दी थी फक्त तालीम प्यार की,
हमने ही नफरतो से दुनिया को श्मसान बनाया.......
उसने तो बनाया था संसार स्वर्ग सा,
हमने बेमतलब जहाँ को कब्रिस्तान बनाया.........