शनिवार, अक्तूबर 30, 2010


वन्दे मातरम दोस्तों,
ये मुझ जैसे ही किसी की दास्ताँ है जिसे डॉक्टरों के अनुसार महज साल भर जीवित रहना है..........


मौत जीवन की अंतिम सच्चाई,
साथ सदा जैसे परछाई,
इससे अब घबराना कैसा?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?...........

अभी मेरी रगों मैं जोश भरा है,
अब जाकर ही होश भरा है ,
अभी करने मुझको काम बहुत हैं,
एक साल का नाम बहुत है,
मौत को पर झुटलाना कैस?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?..............

अब ही तो खुल कर जीना मुझको,
जख्म सभी के सीना मुझको,
रूठे यार मनाने सारे,
रोते यार हसाने सारे,
मौत से कोई बहाना कैसा?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?..............

दिल मैं हैं जज्वात बहुत से,
करने मुझको काज बहुत से,
देश प्रेम का अलख जगाना,
फिर दुनियां को छोड़ के जाना,
मौत को यारों झुठलाना कैसा?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?..........

क्यों जोडू मैं ढेर खजाना,
साथ नही जब मेरे जाना,
क्यों आपस मैं बैर मैं बांधू,
जबकि सब यहीं रह जाना,
जीवन पर इतराना कैसा?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?................

साल भर जीने का बेशक,
डॉक्टर करते हैं वादा,
पर मौत पर भारी है,
जीने का मेरा अटल इरादा,
मौत से यूँ घबराना कैसा?
पर मौत से पहले मर जाना कैसा?................