शनिवार, अक्तूबर 30, 2010

***मैं आँखों को लाखों स्वप्न बेचता हूँ,****

मैं आँखों को लाखों स्वप्न बेचता हूँ,
बिना मोल लेलो, स्वप्न बेचता हूँ..........

स्वर्ग बनाना, हमे देश अपना,
सभी साफ़ दिल हों, हो कोई कपट ना
खुशियाँ हो जिसमे, हर सू सरापा,
वही प्यारा यारों, चमन बेचता हूँ .........

मिल जुल सदा, प्रेम मग्न हो सारे,
आपस मैं लडे ना, ये भाई हमारे,
खूरेंजी को गर्त करो, जाकर सागर मैं,
अमन का पुजारी अमन बेचता हूँ .........

करो याद सब ही, सुभाष और बिस्मिल,
बनो तिलक, पटेल, भगत सिंह से काबिल,
शहीदों ने जिसको, था ओढा फक्र से,
वो वसन्ती मैं प्यारे, कफन बेचता हूँ...............