बुधवार, अक्तूबर 20, 2010

***हम क्यों नही आखिर भारत माँ की बात करते हैं***


वन्दे मातरम भाइयों,

.......हम हिन्दू की बात करते हैं,
मुसलमाँ की बात करते है,
कितने बदकिस्मत हैं हम,
नही भारत माँ की बात करते है......

........हम कश्मीर पर झगड़ते हैं,
गोरखा लेंड पर बिगड़ते हैं,
हम क्यों नही आखिर,
अपने हिदोस्तां पे मरते हैं,.........

हम एक थे, हम एक हैं, हम एक रहेंगे,
नये समाज का निर्माण, हम मिलके करेंगे,
अलगाव के जो नाग, यदा कदा फुफकारते हैं,
अपना बनकर जो हमारी, पीठ मैं खंजर मारते हैं,
ऐसे नागो के फन हम, जूतों से मसलेंगे,
अपनी एकता से हम सारा, निजाम बदलेंगे,........

जय हिंद, जय भारत .........