शनिवार, मार्च 16, 2019

एक नजर इधर भी

सियासत में नजर आती जूतम पैजार जारी है
ये कैसी बदगुमानी है, कैसी ये बीमारी है।
जो कुत्तों की तरह लड़ते रहे, थे एक ही घर से,
कैसी राजनीती ये जो इंसानियत पे भारी है.
#UPMEJOOTAMPAIZAR

समझ सब आ गया हमको, क्यों तूने जी लगाया है,
साथ दुश्मन का देने का, वादा तूने निभाया है।
मिटे गर देश मिट जाए, तुझे क्या फर्क पड़ना है,
यूँ वोट उनके पाने का, कुविचार मन में आया है।
#राहुलगाँधीअजहरजी

एक नजर इधर भी

सियासत में नजर आती जूतम पैजार जारी है
ये कैसी बदगुमानी है, कैसी ये बीमारी है।
जो कुत्तों की तरह लड़ते रहे, थे एक ही घर से,
कैसी राजनीती ये जो इंसानियत पे भारी है.
#UPMEJOOTAMPAIZAR

समझ सब आ गया हमको, क्यों तूने जी लगाया है,
साथ दुश्मन का देने का, वादा तूने निभाया है।
मिटे गर देश मिट जाए, तुझे क्या फर्क पड़ना है,
यूँ वोट उनके पाने का, कुविचार मन में आया है।
#राहुलगाँधीअजहरजी

तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है

हमारी फ़ौज के दम से, मेरा अभिमान बाकी है,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है।
**
हमीद से वीर जिन्दा हैं, वतन पर जान देने को,
अभिनन्दन से सपूतों से , ये हिंदुस्तान बाकी है।
**
वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जान देने का, अभी सम्मान बाकी है।
**
हिमालय गर्व से उन्नत खड़ा है, तान कर सीना,
जगत सिरमौर होने का , अभी भी भान बाकी है।
**
भगतसिंह, बोस,बिस्मिल के लहू से जो नहाई है,
महावीर ने दिया हमको, अभी जो ज्ञान बाकी है।
**
की रिश्वत खोर बैठें हैं, जमीं से आसमानों तक,
तुम्हें देखूं तो लगता है, अभी ईमान बाकी है।
**
दुनिया भर के शास्त्रों को, तूने पड़ लिया होगा,
कहो क्या गीता में लिखा, पड़ना कुरान बाकी है।
**
हम बोते खून खेतों में, सदा ये भूल जाते हैं,
मेरी दिवाली बाकी है, तेरा रमज़ान बाकी है।
**
वतन के द्रोही हैं, हैं पाक हमजोली कायर जो,
वही रणभूमि चिल्लाते, है शांति गान बाकी है।
**
जाफर और जयचंदों, को मैने पाल रखा है,
उन्ही की चालों के चलते, ये पाकिस्तान बाकी है।
**

नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी

नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी,
तुम भ्र्ष्टाचारी, लुटेरे हो, फिर से ये कहूँगा जी।
##
तुम्ही से लड़के तो मैंने, सत्ता का स्वाद पाया है,
तुम्ही ना साथ दोगे तो, तुम्हे जेलों भरूँगा जी।
##
अन्ना के काँधे चढ़कर के, अन्ना को मिटा डाला
वेवफा हूँ महाठग में, वफ़ा कैसे करूँगा जी।
##
सत्ता के शिखर पर काबिज, मगर हठधर्मी है मेरी,
ना कुछ करने ही दूंगा, ना खुद भी मैं करूँगा जी।
##
विश्वास जनता का टूटे, मुझे क्या फर्क पड़ना है,
जनता को फिर बनाने को , फिर धरना धरूँगा जी।
##
#अरविंदकेजरीवाल

नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी

नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी,
तुम भ्र्ष्टाचारी, लुटेरे हो, फिर से ये कहूँगा जी।
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तुम्ही से लड़के तो मैंने, सत्ता का स्वाद पाया है,
तुम्ही ना साथ दोगे तो, तुम्हे जेलों भरूँगा जी।
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अन्ना के काँधे चढ़कर के, अन्ना को मिटा डाला
वेवफा हूँ महाठग में, वफ़ा कैसे करूँगा जी।
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सत्ता के शिखर पर काबिज, मगर हठधर्मी है मेरी,
ना कुछ करने ही दूंगा, ना खुद भी मैं करूँगा जी।
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विश्वास जनता का टूटे, मुझे क्या फर्क पड़ना है,
जनता को फिर बनाने को , फिर धरना धरूँगा जी।
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#अरविंदकेजरीवाल

तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है

हमारी फ़ौज के दम से, मेरा अभिमान बाकी है,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है।
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हमीद से वीर जिन्दा हैं, वतन पर जान देने को,
अभिनन्दन से सपूतों से , ये हिंदुस्तान बाकी है।
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वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जान देने का, अभी सम्मान बाकी है।
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हिमालय गर्व से उन्नत खड़ा है, तान कर सीना,
जगत सिरमौर होने का , अभी भी भान बाकी है।
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भगतसिंह, बोस,बिस्मिल के लहू से जो नहाई है,
महावीर ने दिया हमको, अभी जो ज्ञान बाकी है।
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की रिश्वत खोर बैठें हैं, जमीं से आसमानों तक,
तुम्हें देखूं तो लगता है, अभी ईमान बाकी है।
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दुनिया भर के शास्त्रों को, तूने पड़ लिया होगा,
कहो क्या गीता में लिखा, पड़ना कुरान बाकी है।
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हम बोते खून खेतों में, सदा ये भूल जाते हैं,
मेरी दिवाली बाकी है, तेरा रमज़ान बाकी है।
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वतन के द्रोही हैं, हैं पाक हमजोली कायर जो,
वही रणभूमि चिल्लाते, है शांति गान बाकी है।
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जाफर और जयचंदों, को मैने पाल रखा है,
उन्ही की चालों के चलते, ये पाकिस्तान बाकी है।
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सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है

मेरे सवाल उठाने पर, भड़कना है नही बाजिव,
पूछने और बताने से ही , ये संसार बनता है।
**
जनता को जबाब देना, तेरा दायित्व बड़भागी,
सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है।
**
तुझ पर सवाल उठाना, गद्दारी हो नही सकती,
फ़ौज पर जो सवाली है, वही गद्दार बनता है।
**
तेरे ही दाम पर बिक जाए, तेरा माल नामुमकिन,
पल पल मोल भाव से ही, तो ये बाजार बनता है।
**
जियाले इस धरा पर रोज पैदा हो नही सकते,
हजारों साल में मोदी सा, एक किरदार बनता है।
**
ये दुनिया जब कभी भी तेरा लोहा मान लेती है,
विश्व से आगे चलने का तभी आधार बनता है।
**

सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है

मेरे सवाल उठाने पर, भड़कना है नही बाजिव,
पूछने और बताने से ही , ये संसार बनता है।
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जनता को जबाब देना, तेरा दायित्व बड़भागी,
सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है।
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तुझ पर सवाल उठाना, गद्दारी हो नही सकती,
फ़ौज पर जो सवाली है, वही गद्दार बनता है।
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तेरे ही दाम पर बिक जाए, तेरा माल नामुमकिन,
पल पल मोल भाव से ही, तो ये बाजार बनता है।
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जियाले इस धरा पर रोज पैदा हो नही सकते,
हजारों साल में मोदी सा, एक किरदार बनता है।
**
ये दुनिया जब कभी भी तेरा लोहा मान लेती है,
विश्व से आगे चलने का तभी आधार बनता है।
**

अच्छा है पर कभी कभी

वादा करना फिर ना निभाना, अच्छा है पर कभी कभी,
दिन में हमको स्वपन दिखाना , अच्छा है पर कभी कभी।
लाख सबूतों को मांगो, लाख सवाल उठाओ तुम,
शहादत पर सवाल उठाना, अच्छा है पर कभी कभी।
युद्ध तेरी नस नस है समाया, युद्ध ही तूने ओढा बिछाया,
तेरी जानिब शांति तराना, अच्छा है पर कभी कभी।

अच्छा है पर कभी कभी

वादा करना फिर ना निभाना, अच्छा है पर कभी कभी,
दिन में हमको स्वपन दिखाना , अच्छा है पर कभी कभी।
लाख सबूतों को मांगो, लाख सवाल उठाओ तुम,
शहादत पर सवाल उठाना, अच्छा है पर कभी कभी।
युद्ध तेरी नस नस है समाया, युद्ध ही तूने ओढा बिछाया,
तेरी जानिब शांति तराना, अच्छा है पर कभी कभी।

मंगलवार, मार्च 05, 2019

अभिनन्दन

दुआओं से नही आना है, वापिस यार अभिनन्दन,
खल और दुष्ट के आगे, क्यों हो याचना वंदन,
उठो, दहाडो, दुश्मन की छाती चीर कर लाओ,
जाओ छीन अभिनन्दन को मेरे वीरवर लाओ।
**
ये कैसी कूटनीति थी, ये कैसी राजनीति है,
महज दो रोज के भीतर, हुए आज़ाद अभिनंदन।
रहा है शेर की मानिंद खड़ा, तू कैद ए दुश्मन में,
तेरा शत बार अभिनन्दन, मुबारक बाद अभिनन्दन।
**
वो राजी से नही सौपें है, अपना शेर अभिनन्दन,
वो भितरघाती, कुटील, पापी, करो ना पाक का वंदन।
जो शान्ति की है रखता चाह, पाकिस्तान पल भर भी,
हाफिज सौंपे भारत को, सौंपे दाऊद, अजहर भी।
**

अभिनन्दन

दुआओं से नही आना है, वापिस यार अभिनन्दन,
खल और दुष्ट के आगे, क्यों हो याचना वंदन,
उठो, दहाडो, दुश्मन की छाती चीर कर लाओ,
जाओ छीन अभिनन्दन को मेरे वीरवर लाओ।
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ये कैसी कूटनीति थी, ये कैसी राजनीति है,
महज दो रोज के भीतर, हुए आज़ाद अभिनंदन।
रहा है शेर की मानिंद खड़ा, तू कैद ए दुश्मन में,
तेरा शत बार अभिनन्दन, मुबारक बाद अभिनन्दन।
**
वो राजी से नही सौपें है, अपना शेर अभिनन्दन,
वो भितरघाती, कुटील, पापी, करो ना पाक का वंदन।
जो शान्ति की है रखता चाह, पाकिस्तान पल भर भी,
हाफिज सौंपे भारत को, सौंपे दाऊद, अजहर भी।
**

शहीदों की शौर्यगाथा गा गा कर सुनाओ तुम

नुकसान कितना दुश्मन का, कोई पूछे बताओ तुम,
शहीदों की शौर्यगाथा, गा गा कर सुनाओ तुम।
**
तुम बैठे हिन्द के भीतर, कैसे कर सके गिनती,
सही सवाल है सबका, सवाल को ना घुमाओ तुम।
**
हार और जीत की कोई, तराजू हो नही सकती,
वतन के वास्ते जीना, मरना है निभाओ तुम।
**
तेरा ताकत को माना है, समूचे विश्व ने मोदी,
गद्दार हैं जो भारत के, ताकत उनको दिखाओ तुम।
**
जो मेरे हिन्द के दुश्मन, इधर भी और उधर भी है,
ना बातों के बतासे हों, तोपों से उड़ाओ तुम।
**
चुनावों से नही है देश, देश से ही सभी कुछ है,
देश सिरमौर हो जग में, नीति ऐसी बनाओ तुम।
**
छुपे जो पाक में जाकर, हाफिज हो कि अजहर हो,
चाहे हो बात या की लात, वापिस उनको लाओ तुम।
**


शहीदों की शौर्यगाथा गा गा कर सुनाओ तुम

नुकसान कितना दुश्मन का, कोई पूछे बताओ तुम,
शहीदों की शौर्यगाथा, गा गा कर सुनाओ तुम।
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तुम बैठे हिन्द के भीतर, कैसे कर सके गिनती,
सही सवाल है सबका, सवाल को ना घुमाओ तुम।
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हार और जीत की कोई, तराजू हो नही सकती,
वतन के वास्ते जीना, मरना है निभाओ तुम।
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तेरा ताकत को माना है, समूचे विश्व ने मोदी,
गद्दार हैं जो भारत के, ताकत उनको दिखाओ तुम।
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जो मेरे हिन्द के दुश्मन, इधर भी और उधर भी है,
ना बातों के बतासे हों, तोपों से उड़ाओ तुम।
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चुनावों से नही है देश, देश से ही सभी कुछ है,
देश सिरमौर हो जग में, नीति ऐसी बनाओ तुम।
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छुपे जो पाक में जाकर, हाफिज हो कि अजहर हो,
चाहे हो बात या की लात, वापिस उनको लाओ तुम।
**


शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे

तुझे मालूम भी कुछ है, तेरे जो बोल बिगड़े हैं,
शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे।
**
वो दुश्मन को मिटाये, या लाशों की करें गिनती,
सियासी पिच पे कैसा, ये तेरा बबाल है प्यारे।
**
पुलवामा भी तुझे क्योंकर, दुर्घटना नजर आई,
हाफिज साहिब लगता है, बड़ा कमाल है प्यारे।
**
जंगल और पहाड़ों पर, किया बेकार ही हमला,
तेरी ये जान का सिद्धू, बहुत जंजाल है प्यारे।
**
तुझे जय हिंद कहने में, क्यों परहेज होता है,
तेरी नीयत में आया क्यों, बराबर बाल है प्यारे।
**
नमो तू देश का प्रमुख, फर्ज ये ही तो तेरा है,
किया जो फ़ौज को करना, यही हर हाल है प्यारे।
*
तू इसको चुनावों में, भुनाना चाहता है क्यों,
नही इसमें तेरा कुछ भी, कोई कमाल है प्यारे।
**

शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे

तुझे मालूम भी कुछ है, तेरे जो बोल बिगड़े हैं,
शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे।
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वो दुश्मन को मिटाये, या लाशों की करें गिनती,
सियासी पिच पे कैसा, ये तेरा बबाल है प्यारे।
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पुलवामा भी तुझे क्योंकर, दुर्घटना नजर आई,
हाफिज साहिब लगता है, बड़ा कमाल है प्यारे।
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जंगल और पहाड़ों पर, किया बेकार ही हमला,
तेरी ये जान का सिद्धू, बहुत जंजाल है प्यारे।
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तुझे जय हिंद कहने में, क्यों परहेज होता है,
तेरी नीयत में आया क्यों, बराबर बाल है प्यारे।
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नमो तू देश का प्रमुख, फर्ज ये ही तो तेरा है,
किया जो फ़ौज को करना, यही हर हाल है प्यारे।
*
तू इसको चुनावों में, भुनाना चाहता है क्यों,
नही इसमें तेरा कुछ भी, कोई कमाल है प्यारे।
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