रविवार, अगस्त 18, 2019

हे भारत के वीर उठो, में तुम्हें उठाने आया हूँ,

हे भारत के वीर उठो, में तुम्हें उठाने आया हूँ,
गद्दारों की भाल कपाल पे, ध्वज लहराने आया हूँ।
साजिश का बारूद बिछा है, कश्मीर की सरहद पर,
मेरे साथ चलोगे क्या तुम, शीश चढ़ाने आया हूँ।
युद्ध हमारे द्वार खड़ा है, हमें दिखाई दे ना दे,
सीमा पर बूटों की आहट, हमे सुनाई दे ना दे,
लाल हो गई सारी झेलम, लाशें हर घर हर दर है,
स्वपन नही सच्चाई है, जी तुम्हें दिखाने आया हूँ।
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।
जाग शिवा के वंशज जागो, राणा ले तलवार उठो,
रणचंडी का खप्पर भरना, करकर के हुंकार उठो,
घर घर हममे पृथ्वीराज है, हर योद्धा अभिनन्दन है,
हम में से हर कोई भगत है, यही बताने आया हूँ
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।
कश्मीर ये सारा बैठा है, ज्वालामुखी के मुहाने पर,
नफ़रत घात लगाकर बैठी, शांति के ताने बाने पर,
सरहद पार के दुश्मन हमको, लाख दिखाई दें लेकिन,
सांप हमारी आस्तीन में, ये समझाने आया हूँ।
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।

शनिवार, मार्च 16, 2019

एक नजर इधर भी

सियासत में नजर आती जूतम पैजार जारी है
ये कैसी बदगुमानी है, कैसी ये बीमारी है।
जो कुत्तों की तरह लड़ते रहे, थे एक ही घर से,
कैसी राजनीती ये जो इंसानियत पे भारी है.
#UPMEJOOTAMPAIZAR

समझ सब आ गया हमको, क्यों तूने जी लगाया है,
साथ दुश्मन का देने का, वादा तूने निभाया है।
मिटे गर देश मिट जाए, तुझे क्या फर्क पड़ना है,
यूँ वोट उनके पाने का, कुविचार मन में आया है।
#राहुलगाँधीअजहरजी

तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है

हमारी फ़ौज के दम से, मेरा अभिमान बाकी है,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है।
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हमीद से वीर जिन्दा हैं, वतन पर जान देने को,
अभिनन्दन से सपूतों से , ये हिंदुस्तान बाकी है।
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वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जान देने का, अभी सम्मान बाकी है।
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हिमालय गर्व से उन्नत खड़ा है, तान कर सीना,
जगत सिरमौर होने का , अभी भी भान बाकी है।
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भगतसिंह, बोस,बिस्मिल के लहू से जो नहाई है,
महावीर ने दिया हमको, अभी जो ज्ञान बाकी है।
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की रिश्वत खोर बैठें हैं, जमीं से आसमानों तक,
तुम्हें देखूं तो लगता है, अभी ईमान बाकी है।
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दुनिया भर के शास्त्रों को, तूने पड़ लिया होगा,
कहो क्या गीता में लिखा, पड़ना कुरान बाकी है।
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हम बोते खून खेतों में, सदा ये भूल जाते हैं,
मेरी दिवाली बाकी है, तेरा रमज़ान बाकी है।
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वतन के द्रोही हैं, हैं पाक हमजोली कायर जो,
वही रणभूमि चिल्लाते, है शांति गान बाकी है।
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जाफर और जयचंदों, को मैने पाल रखा है,
उन्ही की चालों के चलते, ये पाकिस्तान बाकी है।
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नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी

नही गठजोड़ जो होगा, तुम्हें मैं देख लूंगा जी,
तुम भ्र्ष्टाचारी, लुटेरे हो, फिर से ये कहूँगा जी।
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तुम्ही से लड़के तो मैंने, सत्ता का स्वाद पाया है,
तुम्ही ना साथ दोगे तो, तुम्हे जेलों भरूँगा जी।
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अन्ना के काँधे चढ़कर के, अन्ना को मिटा डाला
वेवफा हूँ महाठग में, वफ़ा कैसे करूँगा जी।
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सत्ता के शिखर पर काबिज, मगर हठधर्मी है मेरी,
ना कुछ करने ही दूंगा, ना खुद भी मैं करूँगा जी।
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विश्वास जनता का टूटे, मुझे क्या फर्क पड़ना है,
जनता को फिर बनाने को , फिर धरना धरूँगा जी।
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#अरविंदकेजरीवाल

सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है

मेरे सवाल उठाने पर, भड़कना है नही बाजिव,
पूछने और बताने से ही , ये संसार बनता है।
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जनता को जबाब देना, तेरा दायित्व बड़भागी,
सत्ता पे सवाल उठाना, मेरा अधिकार बनता है।
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तुझ पर सवाल उठाना, गद्दारी हो नही सकती,
फ़ौज पर जो सवाली है, वही गद्दार बनता है।
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तेरे ही दाम पर बिक जाए, तेरा माल नामुमकिन,
पल पल मोल भाव से ही, तो ये बाजार बनता है।
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जियाले इस धरा पर रोज पैदा हो नही सकते,
हजारों साल में मोदी सा, एक किरदार बनता है।
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ये दुनिया जब कभी भी तेरा लोहा मान लेती है,
विश्व से आगे चलने का तभी आधार बनता है।
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अच्छा है पर कभी कभी

वादा करना फिर ना निभाना, अच्छा है पर कभी कभी,
दिन में हमको स्वपन दिखाना , अच्छा है पर कभी कभी।
लाख सबूतों को मांगो, लाख सवाल उठाओ तुम,
शहादत पर सवाल उठाना, अच्छा है पर कभी कभी।
युद्ध तेरी नस नस है समाया, युद्ध ही तूने ओढा बिछाया,
तेरी जानिब शांति तराना, अच्छा है पर कभी कभी।

मंगलवार, मार्च 05, 2019

अभिनन्दन

दुआओं से नही आना है, वापिस यार अभिनन्दन,
खल और दुष्ट के आगे, क्यों हो याचना वंदन,
उठो, दहाडो, दुश्मन की छाती चीर कर लाओ,
जाओ छीन अभिनन्दन को मेरे वीरवर लाओ।
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ये कैसी कूटनीति थी, ये कैसी राजनीति है,
महज दो रोज के भीतर, हुए आज़ाद अभिनंदन।
रहा है शेर की मानिंद खड़ा, तू कैद ए दुश्मन में,
तेरा शत बार अभिनन्दन, मुबारक बाद अभिनन्दन।
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वो राजी से नही सौपें है, अपना शेर अभिनन्दन,
वो भितरघाती, कुटील, पापी, करो ना पाक का वंदन।
जो शान्ति की है रखता चाह, पाकिस्तान पल भर भी,
हाफिज सौंपे भारत को, सौंपे दाऊद, अजहर भी।
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शहीदों की शौर्यगाथा गा गा कर सुनाओ तुम

नुकसान कितना दुश्मन का, कोई पूछे बताओ तुम,
शहीदों की शौर्यगाथा, गा गा कर सुनाओ तुम।
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तुम बैठे हिन्द के भीतर, कैसे कर सके गिनती,
सही सवाल है सबका, सवाल को ना घुमाओ तुम।
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हार और जीत की कोई, तराजू हो नही सकती,
वतन के वास्ते जीना, मरना है निभाओ तुम।
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तेरा ताकत को माना है, समूचे विश्व ने मोदी,
गद्दार हैं जो भारत के, ताकत उनको दिखाओ तुम।
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जो मेरे हिन्द के दुश्मन, इधर भी और उधर भी है,
ना बातों के बतासे हों, तोपों से उड़ाओ तुम।
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चुनावों से नही है देश, देश से ही सभी कुछ है,
देश सिरमौर हो जग में, नीति ऐसी बनाओ तुम।
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छुपे जो पाक में जाकर, हाफिज हो कि अजहर हो,
चाहे हो बात या की लात, वापिस उनको लाओ तुम।
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शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे

तुझे मालूम भी कुछ है, तेरे जो बोल बिगड़े हैं,
शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे।
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वो दुश्मन को मिटाये, या लाशों की करें गिनती,
सियासी पिच पे कैसा, ये तेरा बबाल है प्यारे।
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पुलवामा भी तुझे क्योंकर, दुर्घटना नजर आई,
हाफिज साहिब लगता है, बड़ा कमाल है प्यारे।
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जंगल और पहाड़ों पर, किया बेकार ही हमला,
तेरी ये जान का सिद्धू, बहुत जंजाल है प्यारे।
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तुझे जय हिंद कहने में, क्यों परहेज होता है,
तेरी नीयत में आया क्यों, बराबर बाल है प्यारे।
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नमो तू देश का प्रमुख, फर्ज ये ही तो तेरा है,
किया जो फ़ौज को करना, यही हर हाल है प्यारे।
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तू इसको चुनावों में, भुनाना चाहता है क्यों,
नही इसमें तेरा कुछ भी, कोई कमाल है प्यारे।
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शनिवार, मार्च 02, 2019

शब्द गर ना रहे तो देश चुप हो जाएगा

शब्द है आज़ाद जब तक, देश की परवाज़ तब तक,
शब्द गर चुप हो गए तो, देश चुप हो जाएगा।
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शब्द हैं तो है भगतसिंह, शब्द ही से गांधी है,
शब्द ही गर ना रहे , आज़ाद भी खो जाएगा।
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होते गर ना शब्द फिर आज़ादी हम लाते कहाँ से,
लाला क्या फिर बोल पाते, लाठी खा रो जाएगा।
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शब्द ही के दम से भारत, विश्व मे दमदार है,
शब्द के दम से शांति, शब्द युद्ध भी बो जाएगा।
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शब्द ही जब ना रहेंगे, शब्द वीरों का क्या होगा,
शब्द के ही दम से जो जिंदा, उन लकीरों का क्या होगा।
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शब्द गर ख़ामोश होते, द्रोपदी ना चीर होता,
भीष्म और दुर्योधन, ना अभिमन्यु सा वीर होता।
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शब्द सीना ना चीरते, शब्द गर खो जाते जो,
शब्द अपनो को ना खोते, लव चुप ही रह जाते जो।
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शब्द की महिमा बखाने शब्द भेदी कौन है,
खुद में है तूफ़ां छुपाये, शब्द जब तक मौन है।
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शब्द है जब तक मैं हूँ, में हूँ जब तक नाद है,
शब्द से ही है बहारें, शब्द से चमन आबाद है

गुरुवार, फ़रवरी 28, 2019

है नमन उनको की जिनके दम से है दमदार भारत

है नमन उनको की जिनके, दम से है दमदार भारत,
है नमन उनको की जो, जीवित हिमालय हो गए है।
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है नमन उनको की जो, हँस कर जहर का है पान करते,
हिन्द की मिट्टी में कब, कैसे, कहाँ वो खो गए है।
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है नमन उनको की जो माता की गोदी छोड़ आये,
हिन्द की माटी को माँ कह, गोद माँ की सो गए है।
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है नमन उनको जो हँस कर, फाँसी के फंदे पे झूले,
लौट कर आये नही है, किस सफर को वो गए है।
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हैं नमन उनको की जो, सीमा पे दिन रात जगते,
छोड़ कर मधुमास अपना, मेरी खातिर जो गए है।
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है नमन उनको की जो, पुलवामा में मारे गए है,
घर के जयचंदों के चलते, जिनके परिजन रो रहे है।
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है नमन उनको की जो, बलिवेदी सत्ता की चढ़े है,
खुद के हाथों ही जो खुद की, लाश काँधे ढो रहे है।
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है नमन उनको की जिनके, दम से है आज़ाद भारत,
जलियांवाला की मिट्टी में, जज्ब कबके ही गए है।
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चलो उठो हिमालय से सुनो आवाज़ आती है

चलो उठो हिमालय से, सुनो आवाज़ आती है,
दामन मेरा घायल है, धधकती मेरी छाती है।
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जो उनकी कैद में पहुंचा है, मेरा ये शेर अभिनंदन,
तुम उसको छीन कर लाओ, शहीदों की वो थाती है।
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मेरी ही गोद मे पलकर, तिरंगा जो जलाते है,
उन्हें तुम कफ़न पहनाओ, तिरंगे के जो घाती हैं।
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ये आतंकी और जिहादी जो तुमने पाल रखे है,
वो क्योंकर जिंदा है अब तक, बात मुझको सताती है।
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शहीदों की चिताओं पर जो करते वोट की बातें,
कहीं वो मर नही जाते, लाज उनको ना आती है।
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ये मस्तिष्क खून से मेरा, जिन्होंने रख दिया रँगकर,
ना उनको मार पाए तुम, मुझे हर शब रुलाती है।
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वो भारत की नही जनता, वो भारत की नही होगी,
भारत मुर्दाबाद के नारे, जो भारत मे लगाती है।
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आस्तीनों में पाले साँप, तुमको रातो दिन डसते,
दूध के बदले जहर देंगे, यही तो इनकी जाति है।
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है भारत से अलग होने की, जिनको रातो दिन हसरत,
उन्हें भारत से दौड़ाओ, आतंक के जो साथी है
**

युद्ध तेरे द्वारे चल गया, शांति गीत के गायक सुनलो

युद्व तेरे द्वारे चल आया, शान्ति गीत के गायक सुनलो,
पैर पड़ो या शस्त्र उठाओ, कायर, तुम नालायक सुनलो।


पुलवामा हम मांगे नही थे, ना कसाब न्यौता था हमने,
संसद लहूलुहान हुई थी, संसद के खलनायक सुनलो।

तीस साल से लड़ा जा रहा, छद्दम युद्ध मेरी सरहद पर,
रक्त रंजित सारी घाटी, तब कब बुद्ध मेरी सरहद पर,
अलगाववादी काले विषधर, दूध ही पीकर जहर उगलते,
पत्थरबाज यहाँ नित पलते, जनता क्रुद्ध मेरी सरहद पर।

पठानकोट में शान्ति दूतों, तुमने कितने हाथ लगाए,
उरी में सरहद लहूलुहान, तुम बिल से कब बाहर आये,
"तेरे कातिल जिंदा है के" नारे जब थे मेरे देश मे,
लाल चौक पर जला तिरंगा, तुम घर बैठ मलाई खाये।

जंग कहाँ कब चाही हमने, दुश्मन खुद छाती चढ़ आया,
कश्मीर से मुंबई तक ,  आतंक का भाला गढ़ आया,
हमसे तो कश्मीर चाहिए , 26/11 का मसला क्या,
लादेन तुम्हारा ही पाला, अमेरिका से क्यूँ लड़ आया।

शांति की तुम भीख मांगते , मौत खड़ी जब द्वार तुम्हारे,
कहाँ थी तब शांति की बातें, सैनिक मरते रोज हमारे,
किस बिल दुबके थे तुम, जब विस्फोटों में लोग मरे थे,
मौत सामने खड़ी दिखी तो, शांति नायक बन गए सारे।

चलो शान्ति की बात मानते, अजहर हमको सौंपो आकर,
भारत माँ के चरण डाल दो, हाफिज सईद को भी लाकर,
वादा ये लिखित में दे दो, काश्मीर की बात ना होगी,
दाऊद भी तो हमे चाहिए, खुद दोगे हम लाएं जाकर।

बुधवार, फ़रवरी 27, 2019

अभी तो कब्र ए अजहर पर, हमे फातिहा पड़ना है

अभी बदला नहीं पूरा, अभी बदला अधूरा है,
अभी वो आँख है कायम, जिसने मेरा देश घूरा है।
अभी तो कब्र ए अजहर पर, हमे फातिहा पड़ना है,
अभी हाफिज सईद से भी, होनी कुश्ती नूरा है।


अभी खुद मेरे घर मे बहुत से, जयचन्द बाकी है,
वतन को तोड़ना चाहे वो कुछ मतिमन्द बाकी है,
अभी कीचड़ उतरकर के हमे खुद साफ करनी है,
सियासत की वो बदबूदार अभी दुर्गंध बाकी है।

टुकड़ा गैंग जिंदा है, अभी शिक्षा के मंदिर में,
तिरंगे को जलाने की नई, तरकीबें कश्मीर में,
आतंकी की फाँसी पर जो शर्मिंदा बहुत होते,
उन्हें कब मौत आई है, वो जीवित है मेरे घर में।

अभी कश्मीर में नफरत के गिद्ध, परवाज़ करेंगे,
कुटिल पाक के मंसूबे पूरे , ये पत्थरबाज करेंगे,
वो जो पाक परस्त है, जयचन्द मेरे भारत के,
वो रो कश्मीर की जनता से, फिर आवाज़ करेंगे

खाते हिन्द की गाते सदा ही, पाक का गाना,
कानून ऐसा बनना है, उन्हें हो पाक ही जाना,
भारत मात के भटके ये बेटे, है नही हरगिज,
कोई बेटा कब चाहे, खुद ही माता को मिटाना।


मंगलवार, फ़रवरी 26, 2019

सर्जिकल स्ट्राईक 2 पर कुछ पंक्तियां

पाकिस्तानी कब्र खड़ा, अजहर मुँह लटकाय,
सिर भारतीय फौज है हरगिज बचा न जाय।
**


नही हुआ पूरा, अभी है बहुत लड़ाई,
मरने है अजहर मसूद से आताताई,
बहुत बधाई , वायु सेना, सर्जिकल सरहद के पार,
बहुत मार लिए तूने मसूद, अब मरने हो जा तैयार।
**
12 दिन, 12 ठिकाने, 12 ही मिराज,
वायुसेना की कार्यवाही, चौड़ा सीना आज।
बालाकोट, चिकोटी खत्म, खत्म मुजफ्फराबाद,
हिंदुस्तानी फ़ौज को, बहुत मुबारकबाद।
**
अभी तो पार्टी शुरू हुई है, अभी तो केवल झांकी है,
दो, तीन सौ मरें हो बेशक,
अजहर का मरना बाकी है।
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काँधे चढ़कर नाच रहे थे, आतंक के ये काले विषधर,
अब्दुल्ला, महबूबा गिलानी, कौन है किसने पाले विषधर।
मिट्टी इनको मिलना होगा, हुए सेना के हवाले विषधर,
आज तो ये आगाज़ हुआ है, पाकिस्तान बचा ले विषधर।
**
अभी बदला नहीं पूरा, अभी बदला अधूरा है,
अभी वो आँख है कायम, जिसने मेरा देश घूरा है।
अभी तो कब्र ए अजहर पर, हमे फातिहा पड़ना है,
अभी खुद देश के जयचंदों से, होनी कुश्ती नूरा है।
**
क्यों हिन्दुस्तान में पसरा है, पाकिस्तान का मातम,
उधर मरते है आतंकी, तुझे किस बात का है गम।
पाकिस्तान क्या तेरा, नाजायज़ बाप लगता है,
पाकिस्तान की निंदा में, तुझे क्यों पाप लगता है।
**

देश से कुछ तो करो अब प्यार नेताजी

बन्द करो कुछ रोज ये प्रचार नेताजी,
सेना है अब समर को, तैयार नेताजी।
जीवन तेरा बीत गया, पाक परस्ती में,
देश से अब तो करो कुछ प्यार नेताजी।